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प्रतिवर्ष 10 लाख लोग दुनियाभर में व प्रतिदिन 2539 भारत में तम्बाकू जनित बीमारियों व कैंसर के कारण मौत के आंचल में समा जाते हैं । एक सिगरेट ज़िन्दगी के 11 मिनट कम कर देती है । भारत तम्बाकू उत्पादन व उपभोग में दूसरे स्थान पर है , प्रति 6 सेकंड में एक मौत तम्बाकू के कारण होती है आदि आदि , यह सब आंकड़े बताते हैं की जिस शत्रु से हमारी लड़ाई है वह कितना ख़तरनाक है ।तम्बाकू जिसे किसी परिचय कि आवश्यकता नहीं और जिससे आज समाज का प्रत्येक वर्ग अछूता ना रहा ।शहर, गांव या कस्बा तम्बाकू की दस्तक प्राचीनकाल से ही हर घर में रहती आई है ।आज हमारे जीवन के दैनिक महत्वपूर्ण उपभोगों में जैसे खाना, पीना , मोबाइल , गाड़ी इत्यादि हैं वैसे ही कहीं ना कहीं तम्बाकू भी है ।
तम्बाकू एक साधारण सा सुनाई देने वाला शब्द जिसकी वजह से किसी ना किसी घर में आए दिन कोई अपना आपका हमेशा के लिए साथ छोड़ देता है , जाने क्या है इसकी हाकीकत ।
तम्बाकू का बहुत सारे रोग जैसे कैंसर,फेफड़ों की बीमारी ,हृदय रोग आदि मुख्य कारकों में से एक हैं ,हमारे देश में तम्बाकू का सेवन धूम्रपान,गुटखा , सिगार आदि कई रूपों में किया जाता है ।
सबसे जटिल समस्या यह है कि इसकी उपलब्धता बड़ी आसान है व युवा वर्ग सबसे ज़्यादा इसके शिकार हो रहे हैं ।
देश में तम्बाकू नीतियों की विसंगतियां व जागरूकता का अभाव साथ ही जन भागीदारी सभी प्रकार से हम अभी पीछे हैं ।
तम्बाकू की लत :- हमारे मस्तिष्क में कई रसायनों का बेजोड़ समागम है व प्रत्येक रसायन का अपना एक काम होता है । Dopamine हमें एहसास करता है आनंद का , यह हमारे शरीर में अपने आप बनता है व स्वत ही रिलीज होता है जिससे हमें आनंद का एहसास होता है , परन्तु तम्बाकू सेवन या मादक पदार्थों के अति व नियमित सेवन से यह प्रक्रिया प्राकृतिक ना होकर हमारे व्यसन पर निर्भर हो जाती है जिसके कारण हमें लत लगती है ,भविष्य में किसी नशे की शुरुआत के लिए यह एक बैसाखी के जैसे कार्य करता है।
भारत द्वारा तम्बाकू नियंत्रण में बनाई गई नीतियां –
राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कानून 2003
राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम 2007 (NTCP)
WHO framework convention on tobacco control आदि कई सारी नीतियां समय समय पर देश दुनिया में बनती आई हैं ।
होने वाला आर्थिक नुकसान – तम्बाकू सेवन से चिकित्सा खर्च में वृद्धि होती है व घरेलू आय में कमी आती है जिससे गरीबी बढ़ती है ।
अनुमानित आंकड़ों की माने तो प्रतिवर्ष 1,04,500 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष भारत में तम्बाकू की आर्थिक लागत है ।
साथ ही इसका सेवन प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जान लेता है जो समाज के स्वास्थ्य हेतु सबसे बड़ा खतरा है ।
सचित्र चेतावनियां :- अब तो हमारे देश का न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने भी आदेश कर चुका है कि तम्बाकू उत्पादों पर सचित्र चेतावनियां देना ज़रूरी है ।
तम्बाकू कंपनियां भी जानती है कि किशोर अवस्था में अगर कोई इसका सेवन करता है तो संभवतः आजीवन वह व्यक्ति उसका सेवन करेगा ।
तम्बाकू उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस की जरूरत पड़ती है पर हमारे यहां बिना लाइसेंस के इसका व्यापार होता है । बच्चों व किशोरों को तम्बाकू की बिक्री पर प्रतिबंध है पर इस नियम का क्रियान्वयन ही सही से नहीं हो पाता ।
जरूरत है :- जरूरत है नियमों के सही क्रियान्वयन की , साथ ही समाज में इसके प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने की , इसे एक आंदोलन के रूप में तब्दील कर जनभागीदारी की, संबंधित कंपनियों को नियामकों का पालन करने की व सरकार के सख्त रुख को अपनाने की।
निष्कर्ष :- देश को सार्वजनिक स्वास्थ के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे नियम बनाने होंगे जिसका क्रियान्वयन सुचारू रूप से प्रशासन व जन भागीदारी के अनुरूप होना चाहिए ।

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