आपको यह समझना ज़रूरी है कि यह एक बीमारी है ना कि मरीज़ की जानबूजकर की जाने वाली गलती । आपका अपना नशा कर रहा है और उसे छोड़ना नहीं चाहता यह गलतफहमी आपको दिमाग से निकालनी होगी क्योंकि वो एक ऐसी दुनिया में है जहां ना आप जा सकते हैं और ना मरीज़ स्वयं आ सकता है ,इस वक़्त उसे जरूरत होती है सहारे की ।मरीज़ को इलाज हेतु सही जगह , मौका और पर्याप्त वक्त दें । ऐसे प्लेटफॉर्म की तलाश करें जहां संबंधित addiction का पूर्ण रूप से सफल इलाज होता है मरीज़ के द्वारा नशा छोड़ने की राह में उठाए गए छोटे छोटे कदमों की सराहना करें , कभी मरीज़ पर नकारात्मक व्यंग ना कसें ,जानें इलाज से जुड़ी समस्त थेरेपी जो एक ही जगह उपलब्ध हों जैसे detoxification , withdrawn management , counselling आदि । वहां बात करें और पूर्ण रूप से आश्वस्त होने के बाद ही मरीज़ को वहां भर्ती करें साथ में यह भी जाने की जहां आपने उसे भर्ती कराया है वहां के परिणाम अब तक कैसे रहे हैं ,साधारणतः देखा जाता है कि नशा करने वाले के घर में आमतौर पर तनाव या अप्रिय घटना होती रहती है इसलिए मरीज़ की भर्ती के साथ फैमिली काउंसलिंग भी ज़रूरी होती है ।

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